राम मंदिर चढ़ावा विवाद: आरोप, जाँच और अब तक क्या पता है
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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: आरोप, जाँच और अब तक क्या पता है

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भक्तों के दान/चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मामला राजनीतिक और सामाजिक रूप से गरमाया हुआ है। मामले की जाँच एक विशेष जाँच दल (SIT) कर रहा है।

📍 अयोध्या, उत्तर प्रदेश · अपडेट: 19 जून 2026 · पढ़ने का समय ~ 5 मिनट
ज़रूरी बात: इस लेख में दर्ज सभी बातें फ़िलहाल आरोप और जाँच के स्तर पर हैं। किसी भी व्यक्ति या संस्था पर अदालत में अब तक कोई आरोप साबित नहीं हुआ है। संबंधित ट्रस्ट ने किसी भी गड़बड़ी से इनकार किया है।

जनवरी 2024 में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद से अयोध्या का राम मंदिर हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, जो नकद, सोना, चाँदी और आभूषण दान-पात्र (हुंडी) में चढ़ाते हैं। इन्हीं चढ़ावों के हिसाब-किताब को लेकर जून 2026 की शुरुआत में सवाल उठने लगे। आरोप है कि दान की गिनती और रिकॉर्ड में गड़बड़ी हुई और कुछ रकम का हिसाब मेल नहीं खा रहा।

मामला शुरू कैसे हुआ

रिपोर्टों के अनुसार विवाद की चिंगारी तब भड़की जब दान गिनने वाले कुछ कर्मचारियों की जीवनशैली में अचानक आए बदलाव पर सवाल उठे। कहा गया कि लगभग ₹14,000–20,000 मासिक वेतन पाने वाले कुछ कर्मचारी कुछ ही वर्षों में करोड़ों की संपत्ति के मालिक बन गए। मामला पहले मंदिर प्रशासन तक सीमित रहा, फिर मीडिया में आया और 7 जून 2026 के बाद इसने राजनीतिक रूप ले लिया।

एक नज़र में मुख्य बिंदु

  • कथित गड़बड़ी की रकम को लेकर अलग-अलग आँकड़े सामने आए — कहीं ₹7.5 करोड़, तो कुछ जाँच अनुमानों में यह ₹200 करोड़ से ऊपर तक बताई जा रही है (पुष्टि बाक़ी)।
  • उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जाँच के लिए एक विशेष जाँच दल (SIT) गठित किया है।
  • रिपोर्टों के अनुसार 50 से अधिक लोगों से पूछताछ हुई है, जिनमें दान-गिनती से जुड़े कर्मचारी, एजेंसी प्रतिनिधि और बैंक अधिकारी शामिल हैं।
  • जाँच में वित्तीय रिकॉर्ड, दान के दस्तावेज़ और बैंक लेन-देन का मिलान किया जा रहा है।

जाँच के दायरे में कौन

रिपोर्टों में सबसे चर्चित नाम रामशंकर यादव उर्फ़ टिन्नू का है, जिन्हें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का क़रीबी बताया जा रहा है। मीडिया दावों के अनुसार जाँचकर्ता उनसे जुड़ी अयोध्या और लखनऊ में बड़ी संपत्तियों की पड़ताल कर रहे हैं। टिन्नू यादव ने एक वीडियो बयान जारी कर ख़ुद को निर्दोष बताया है। SIT ने महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी और कुछ अधिकारियों से भी पूछताछ की है। यह दोहराना ज़रूरी है कि पूछताछ का मतलब दोष साबित होना नहीं है।

राजनीतिक रंग

विपक्ष की ओर से समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देकर न्यायिक हस्तक्षेप और पारदर्शी जाँच की माँग उठाई। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में कहा कि SIT जाँच से सब साफ़ हो जाएगा और आरोप लगाने वालों को कड़ी प्रतिक्रिया दी। यानी मामले पर सत्ता और विपक्ष दोनों आमने-सामने हैं।

ट्रस्ट का पक्ष

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने किसी भी तरह की गड़बड़ी या कुप्रबंधन से इनकार किया है। ट्रस्ट के अनुसार पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नियमित आंतरिक ऑडिट किए जाते हैं और दान का हिसाब-किताब तय प्रक्रिया से होता है। हाल में सुरक्षा और भोग-प्रसाद पर हुए ख़र्च को लेकर भी सवाल उठे हैं, जिनकी पड़ताल जाँच का हिस्सा है।

✔ जो स्पष्ट है

मामले की औपचारिक SIT जाँच चल रही है, कई लोगों से पूछताछ हुई है और वित्तीय रिकॉर्ड की समीक्षा की जा रही है।

⚠ जो अभी आरोप है

गड़बड़ी की सही रकम, उसमें शामिल लोग और जिम्मेदारी — ये सब अभी जाँच के नतीजे और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर हैं।

आगे क्या

SIT को तय समय में रिपोर्ट सौंपनी है। जाँच पूरी होने और तथ्यों के सामने आने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाज़ी होगी। पाठकों के लिए बेहतर है कि वे आधिकारिक बयानों और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से ही जानकारी लें और अफ़वाहों से बचें।

संपादकीय नोट: यह लेख विभिन्न समाचार रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया एक सूचनात्मक सारांश है। मामला विचाराधीन है; इसमें दर्ज आरोप किसी व्यक्ति का दोष सिद्ध नहीं करते। प्रकाशित करने से पहले ताज़ा अपडेट अवश्य जाँच लें।

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